“Pegasus Spyware की पूरी सच्चाई : दुनिया का सबसे खतरनाक DIGITAL जासूस”

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न्यूज़ 4 पर्दाफ़ाश डॉट वर्ल्ड

एक्सक्लूसिव इन्वेस्टिगेशन

आज के डिजिटल दौर में मोबाइल फोन सिर्फ बातचीत का माध्यम नहीं रह गया है, बल्कि यह किसी भी व्यक्ति की पूरी निजी जिंदगी का डिजिटल रिकॉर्ड बन चुका है। ऐसे समय में एक नाम पूरी दुनिया में डर और विवाद का कारण बना — Pegasus Spyware।

यह वही स्पाइवेयर है जिसने कई देशों की सरकारों, पत्रकारों, एक्टिविस्टों और नेताओं की निगरानी को लेकर वैश्विक बहस छेड़ दी।


Pegasus Spyware क्या है?

Pegasus एक अत्याधुनिक साइबर जासूसी सॉफ्टवेयर है जिसे इजराइल की कंपनी NSO Group ने विकसित किया है।

इसका दावा है कि यह तकनीक केवल आतंकवाद और संगठित अपराध से लड़ने के लिए सरकारों को बेची जाती है।

लेकिन जांच में सामने आया कि कई देशों में इसका इस्तेमाल पत्रकारों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और विपक्षी नेताओं की निगरानी के लिए भी हुआ।


Pegasus फोन में कैसे घुसता है?

Pegasus इतना खतरनाक इसलिए माना जाता है क्योंकि यह बिना किसी क्लिक के भी फोन में घुस सकता है। इसे Zero-Click Attack कहा जाता है।


संक्रमण के प्रमुख तरीके:

1️⃣

 WhatsApp कॉल या मैसेज के जरिए

2️⃣

 iMessage या SMS के जरिए

3️⃣

 किसी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से

4️⃣

 मिस्ड कॉल से भी संक्रमण संभव

5️⃣

 नेटवर्क स्तर से हमला

जांच में सामने आया कि यह WhatsApp जैसे प्लेटफॉर्म की कमजोरियों का फायदा उठाकर फोन में प्रवेश कर सकता है।


Pegasus फोन में क्या-क्या कर सकता है?

एक बार फोन में इंस्टॉल हो जाने के बाद Pegasus लगभग पूरा कंट्रोल हासिल कर सकता है:

फोन की कॉल रिकॉर्ड करना
WhatsApp / Telegram चैट पढ़ना
ई-मेल एक्सेस करना
कैमरा और माइक्रोफोन चालू करना
लोकेशन ट्रैक करना
फाइलें कॉपी करना
यह सब बिना यूज़र को पता चले हो सकता है।


दुनिया में Pegasus का सबसे बड़ा खुलासा

2021 में एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय जांच में Pegasus का वैश्विक खुलासा हुआ जिसे Pegasus Project कहा गया।
इस जांच में कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान शामिल थे, जिनमें:
Amnesty International
Forbidden Stories
जांच में सामने आया कि हजारों फोन नंबर संभावित निगरानी सूची में थे।

भारत में Pegasus विवाद

भारत में Pegasus को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हुआ।
2021 में रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि कई पत्रकारों, नेताओं और एक्टिविस्टों के फोन संभावित रूप से निगरानी सूची में थे।
इस मामले की जांच के लिए Supreme Court of India ने एक तकनीकी समिति गठित की थी।
हालांकि सरकार ने संसद में कहा कि वह “अनधिकृत निगरानी नहीं करती”, जबकि Pegasus के इस्तेमाल को लेकर सीधा जवाब देने से परहेज किया गया।

क्यों डरते हैं पत्रकार Pegasus से?

पत्रकारों के लिए Pegasus बेहद खतरनाक माना जाता है क्योंकि:
यह स्रोत (sources) की पहचान उजागर कर सकता है
गुप्त दस्तावेज चोरी हो सकते हैं
स्टिंग या जांच प्रभावित हो सकती है
यही वजह है कि कई मीडिया संगठनों ने इसे प्रेस स्वतंत्रता के लिए खतरा बताया।

क्या आम आदमी का फोन भी Pegasus से हैक हो सकता है?

तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार Pegasus बहुत महंगा और अत्यधिक टार्गेटेड स्पाइवेयर है।
इसलिए इसका इस्तेमाल आम लोगों पर नहीं बल्कि High-Value Targets पर किया जाता है, जैसे:
पत्रकार
राजनेता
सरकारी अधिकारी
बड़े कारोबारी
एक्टिविस्ट

क्या Pegasus से बचा जा सकता है?

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ कुछ सावधानियां बताते हैं:
फोन का OS हमेशा अपडेट रखें
संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें
अनजान कॉल या मैसेज से सावधान रहें
समय-समय पर फोन की सुरक्षा जांच कराएं
लेकिन सच यह है कि अत्याधुनिक स्पाइवेयर से पूरी तरह बचना बेहद मुश्किल माना जाता है।

निष्कर्ष

Pegasus ने यह साबित कर दिया कि डिजिटल दुनिया में निजता और निगरानी के बीच की लड़ाई बेहद जटिल हो चुकी है।
तकनीक जहां सुरक्षा का साधन है, वहीं यह सत्ता और नियंत्रण का उपकरण भी बन सकती है।
और सबसे बड़ा सवाल आज भी बना हुआ है —
क्या हमारे फोन सच में सिर्फ हमारे हैं, या कोई और भी उन्हें देख रहा है?

ख़बर समाप्त !

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